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पंच तुलसी ड्रॉप्स को पीने से कईं बीमारियां दूर होती हैं, जैसे सर्दी, खांसी, अपच, मानसिक तनाव और साँस की बदबू आदि। इसका प्रतिदिन इस्तेमाल रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में फायदेमंद होता है।


पंच तुलसी (Pancha Tulsi) ड्रॉप्स क्या है?

पंच तुलसी ड्रॉप्स 18 जुलाई 2016 में Deltas Pharma द्वारा पेश किया गया एक प्रोडक्ट है। इसे 5 तुलसी की प्रजातियों को मिलाकर निर्मित किया गया है। इसकी 15ml की ड्रॉप 160 रुपये से लेकर 220 रुपये तक उपलब्ध है। यह एक दर्द निवारक दवा है जिससे कईं सामान्य रोगों को ठीक किया जाता है।

पंच तुलसी ड्रॉप्स के फायदे, नुकसान और उपयोग, Pancha Tulsi Benefits, Side Effects And Uses In Hindi, Panch Tulsi ke fayde

इसके आलावा, पंच तुलसी टेबलेट के रूप में भी उपलब्ध है। यदि आपको इसे पीने में किसी प्रकार की समस्या हो रही है तो आप इसे टेबलेट के रूप में भी ले सकते हैं।

पंच तुलसी टेबलेट के रूप में भी उपलब्ध है
Image Source: Amazon

इन दोनों दवाओं का सेवन करने के पूर्व अपने डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।

पंच तुलसी ड्रॉप्स के फायदे (Pancha Tulsi Drops Benefits in Hindi)

  1. एंटी ऑक्ससिडेंट युक्त पंच तुलसी ड्रॉप्स रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में फायदेमंद होता है।
  2. सर्दी, खांसी, सिरदर्द और कफ में राहत पहुंचाता है।
  3. त्वचा संक्रमण, लालिमा (त्वचा पर लाल चकत्ते) और चर्म रोग में उपयोगी।
  4. गले में दर्द को दूर करे।
  5. उल्टी और दस्त से छुटकारा दिलाये।
  6. चेहरे पर निखार लाये।
  7. मोटापा और ब्लड प्रेशर कम करे।
  8. पथरी के रोगियों के लिए आरामदायक।
  9. आँखों में दर्द की शिकायत को दूर करे।
  10. पाचन शक्ति को बढ़ाने में उपयुक्त।

मित्रों, पंच तुलसी ड्रॉप्स के और भी कईं फायदे हैं, जिन्हें मरीज डॉक्टर से जान सकते हैं। अब इसके कुछ नुकसान (Side Effect) के बारे जान लेते हैं।

पंच तुलसी ड्रॉप्स के नुकसान (Pancha Tulsi Side Effects in Hindi)

देखिये, वैसे तो इस दवा के कोई गंभीर नुकसान नहीं है, लेकिन इसमें पांच तुलसी की प्रजातियों का इस्तेमाल किया गया है जिनके अधिक सेवन व अनियमितता से कईं रोग पोषित हो सकते हैं। इसलिए नीचे दिए गए साइड इफेक्ट्स तुलसी के स्वाभाविक तत्वों और गुणों के आधार पर दिए गए हैं:

  • पंच तुलसी की तासीर गर्म है जिससे पेट में जलन, दर्द व अपच की समस्या हो सकती है।
  • इसके अधिक सेवन से खून पतला होने की सम्भावना प्रबल होती है।
  • यदि आपका ब्लड शुगर का इलाज चल रहा हो तब इसका सेवन करना हानिकारक हो सकता है।
  • इसके सेवन से प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है।
  • गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इसका सेवन करने पर हानि हो सकती है। उचित यही होगा कि आप इसे डॉक्टर से पूछ कर लें।
  • सर्जरी के दौरान इसके सेवन से ब्लीडिंग अधिक होने का खतरा होता है।

पंच तुलसी ड्रॉप्स के अलावा कईं और ड्रॉप्स भी मार्किट में उपलब्ध है जैसे, Asclepius पंच तुलसी ड्रॉप्स, Keva पंच तुलसी ड्रॉप्स और पतंजलि पंच तुलसी ड्रॉप्स आदि।

दिव्य गोधन अर्क बहुत पुरानी आयुर्वेदिक औषधि है जो गोमूत्र (गाय के मूत्र) की अच्छाईयों से मिलकर बनती है। गोधन अर्क पेट संबंधित रोगों को कम करने में फायदेमंद होता है। इसके अलावा इसके कईं और फायदे हैं जिन्हें जानकर आप हैरान रह जाएंगे। हमने इस आर्टिकल में इससे संबंधित कईं तथ्यों को साझा किया है। उन्हें जानने के लिए अंत तक जरूर पढ़ें।

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गोधन अर्क क्या है?

गोधन अर्क गोमूत्र द्वारा बनाई हुई एक आयुर्वेदिक औषधि है, जिसे डायरिया, ब्लड प्रेशर, चर्म रोग अधिक वजन और पीलिया के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है।

गोधन अर्क पीने के फायदे (लाभ)

  • लिवर और अमाशय संबंधित रोगों से मुक्ति दिलाने में फायदेमंद।
  • गोधन अर्क से मधुमेह पर नियंत्रण किया जा सकता है।
  • इसे किसी भी प्रकार के सामान्य कैंसर में उपयोग कर सकते हैं।
  • यह सिरदर्द, सर्दी, ज़ुकाम, खांसी और बुखार होने से बचाता है।
  • इसका सेवन वो लोग भी कर सकते हैं जो गोमूत्र नहीं पी सकते।
  • शरीर मे जकड़न, छाती में दर्द होने पर इसका इस्तेमाल किया जाता है।
  • गोधन अर्क शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी को दूर करता है, और इसे बढ़ाने में मदद करता है।
  • आप चाहें तो पतंजलि के दिव्य गोधन अर्क का सेवन भी कर सकते हैं। यह आपके लिए काफी लाभदायक हो सकता है।

क्या गोधन अर्क को रोज़ाना पीना सुरक्षित है?

चूंकि यह गोमूत्र से बना है तो इसके कोई दुष्प्रभाव देखने को नहीं मिल सकते। इसलिए गोधन अर्क को पीना सुरक्षित है। किंतु प्रत्येक व्यक्ति का शरीर अलग होता है और उसे कोई ओर बीमारी पहले से हो सकती है तो उस केस में इसे लेना सुरक्षित है या नहीं, यह कह पाना मुश्किल होगा। इसलिए हमारी राय यही है कि आप गोधन अर्क का सेवन करने के पूर्व अपने डॉक्टर या फार्मासिस्ट से चर्चा करें।

गोधन अर्क को रोज़ाना कैसे लें?

गोधन अर्क को किसी चम्मच में 5ml तक निकालें और 50ml पानी में घोल लें, उसके बाद इसे पी जाएं। आप इसी तरीके से दिन में दो बार पी सकते हैं। ध्यान रहे, इसका स्वाद शायद आपको पसंद न आये, इसलिए इसे आराम से न पिएं। आप इसे एक ही सांस में जल्दी से जल्दी पी जाएं क्योंकि इसे टुकड़ों में पीना आपके लिए मुश्किल हो सकता है। हमारी राय यही है कि इसे लेने के पूर्व डॉक्टर का परामर्श अवश्य लें।

पतंजलि दिव्य गोधन अर्क का मूल्य (Price)

पतंजलि के दिव्य गोधन अर्क के 450ml के चार पैक होते हैं जो ₹195 रुपये में मिल जाएंगे। यह लगभग 1800ml का होता है। आप इसे अमेज़न से खरीद सकते हैं।

गोधन अर्क के बारे में और अधिक जानने के लिए कमेंट करें, आज के लिए इतना ही। मिलते हैं अगली एक और नई योजना के साथ। तब तक अपना ध्यान रखिये सुरक्षित रहिये और अपने परिवार का खयाल रखिये।
राहु को कैसे खुश करें। राहु को खुश करने के अचूक उपाय कौन से हैं। यदि राहु आपके कुंडली पर बने हुए हैं तो ऐसे में उन्हें दूर कैसे करें। राहु की दशा को दूर करने के लिए कौन से उपाय लाभकारी हो सकते हैं। इन्हीं सभी प्रश्नों का उत्तर हम आज आपको इस आर्टिकल के माध्यम से देने जा रहे हैं।

राहु को खुश करने के उपाय

राहु को खुश करने से पहले यह जानना बहुत जरुरी है कि आखिर राहु की दशा क्या होती है और इसके कौन - कौन से लक्षण होते हैं।

राहु क्या है?

पुराणों के अनुसार, असुर और देवताओं के द्वारा समुद्र मंथन किया गया था। जिसमें कईं सारे अमृत्व रत्नों की प्राप्ति हुई थी। जिन्हें ब्रह्म देव द्वारा असुर और देवताओं में विभाजित किया गया। अंत में ब्रह्म देव द्वारा अमृत देवताओं को सौंपा गया। जिससे कुछ असुरों को भेद भाव होने की आशंका हुई। जिसके चलते उन्होंने धोखे से अमृत को चुरा लिया और वहां से प्रस्थान कर गए।

अमृत को असुरों से पुनर्प्राप्त करने के लिए नारायण (विष्णु देव) ने मोहिनी रूप धारण किया और असुरों से अमृत प्राप्त कर लिया। उसके बाद असुरों के इस कृत्य के कारण यह निर्णय लिया गया कि देवताओं को सर्वप्रथम अमृत ग्रहण करने का अवसर मिलेगा। नारायण ने स्वयं अपने हाथों से अमृत ग्रहण करवाने का कार्य आरम्भ किया।

किन्तु कुछ असुरों को संदेह था कि अमृत उन्हें मिलेगा या नहीं। इस हेतु उन्होंने देवताओं का वेश धारण किया और अमृत ग्रहण करने का छल किया। लेकिन जैसे ही असुर स्वर्भानु की बारी आयी तब सूर्य और चंद्र देव ने स्वर्भानु को पहचान लिया और नारायण को सचेत कर दिया । किन्तु तब तक असुर स्वर्भानु अमृत ग्रहण कर चूका था।

लेकिन अमृत उसके गले से नीचे जा पाता उससे पहले,

नारायण ने अपने सुदर्शन चक्र से स्वर्भानु का शीश धड़ से अलग कर दिया। उसके बाद महादेव ने कटे हुए सिर और धड़ को नामांकित किया, जिन्हें राहु (कटा हुआ सिर) और केतु (धड़) कहा जाता हैं।

राहु की दशा क्या है?

राहु की दशा, जिस व्यक्ति की कुंडली पर पड़ जाती है उस व्यक्ति की बुद्धि भ्रष्ट होने लग जाती है। उस व्यक्ति को अपने जीवन में काफी कठिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में राहु की दशा व्यक्ति के मानसिक एकाग्रता को भांग कर देती है, जिससे वो गलत निर्णय लेता है और स्वयं को नुकसान पहुँचाने लगता है।

राहु की दशा को पहचानने के लक्षण: -

  1. मानसिक तनाव
  2. आर्थिक नुकसान
  3. शारीरिक व्याधियां
  4. गलतफहमियां
  5. चिड़चिड़ापन
  6. जल्दी से क्रोधित हो जाना
  7. कुवाक्य का प्रयोग करना
  8. नाख़ून का अपने आप टूटना
  9. नशा करना
  10. जुआ खेलना

यदि आप इन सभी लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं तो आपको राहु को प्रसन्न करना होगा, जिससे आपको राहु किसी भी प्रकार की क्षति न पहुंचा सके। राहु को खुश करने के लिए हमने कुछ अचूक उपाय साझा किये हैं जिनका अनुसरण कर आप राहु को खुश कर सकते हैं।

राहु को खुश करने के अचूक उपाय

  • राहु को खुश करने के लिए सुबह राहु मन्त्र का जाप करें।
  • उबले हुए जल का सेवन करें।
  • ताज़ा खाना खाएं।
  • रोज़ाना एक नियमित समय पर स्नान करें।
  • चन्दन का उपयोग करें, आप चाहें तो चन्दन का टीका भी लगा सकते हैं, इससे राहु खुश होते हैं।
  • ज़्यादा बड़े बाल न रखें।
  • कानों को साफ़, नाखूनों को छूटा रखें।
  • मच्छर और मक्खियों को घर में न आने दें।
  • मवेशियों और गली के कुत्तों को खाना खिलाएं।
  • लम्बी यात्रा न करें।
  • दारु, गुटखा और तम्बाकू जैसे नशीले पदार्थों का सेवन न करें। इससे राहु का प्रभाव अधिक होता है।
  • जुए और सट्टे से दूर रहें।
  • भगवान शिव और उनके गले पर विद्यमान शेषनाग (वासुकि) की आराधना करें, इससे राहु का प्रभाव काम होगा।
  • हो सके तो सुबह योग अभ्यास करें।

राहु दशा में पूछे जाने वाले सवाल - FAQ

राहु कौन है?

राहु स्वर्भानु के कटे हुए सिर का नाम है। राहु एक असुर है।

राहु की दशा की अवधि कितनी होती है?

राहु की दशा की अवधि 18 वर्ष होती है।

राहु की दशा में कौन से कारक होते हैं?

राहु की दशा में झूठ, जुआ, नशा, ईर्ष्या, लालच, आर्थिक नुकसान और संक्रमण जैसे कारक होते हैं।

क्या राहु व्यक्ति को उत्साही बनाता है?

जी हाँ, राहु की दशा में व्यक्ति कम समय में अति-उत्साही हो जाता है और इसी उत्साह के चलते वह अपना नुकसान कर बैठता है।

राहु के घर में प्रवेश करने पर क्या होता है?

राहु के घर में प्रवेश करने पर घर के सीवर लाइन में समस्या होने लगती है।

क्या राहु स्वास्थ्य के लिए अच्छा है?

जी नहीं, राहु एक विषधारी सर्प है इसलिए वह आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है। यह आपको हानि पहुंचा सकता है।

राहु की दशा में कौन से रोगों की उत्पत्ति होती है?

राहु की दशा में पेट ख़राब होना, दस्त और सिरदर्द जैसे रोगों की उत्पत्ति होती है।