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राहु को कैसे खुश करें। राहु को खुश करने के अचूक उपाय कौन से हैं। यदि राहु आपके कुंडली पर बने हुए हैं तो ऐसे में उन्हें दूर कैसे करें। राहु की दशा को दूर करने के लिए कौन से उपाय लाभकारी हो सकते हैं। इन्हीं सभी प्रश्नों का उत्तर हम आज आपको इस आर्टिकल के माध्यम से देने जा रहे हैं।

राहु को खुश करने के उपाय

राहु को खुश करने से पहले यह जानना बहुत जरुरी है कि आखिर राहु की दशा क्या होती है और इसके कौन - कौन से लक्षण होते हैं।

राहु क्या है?

पुराणों के अनुसार, असुर और देवताओं के द्वारा समुद्र मंथन किया गया था। जिसमें कईं सारे अमृत्व रत्नों की प्राप्ति हुई थी। जिन्हें ब्रह्म देव द्वारा असुर और देवताओं में विभाजित किया गया। अंत में ब्रह्म देव द्वारा अमृत देवताओं को सौंपा गया। जिससे कुछ असुरों को भेद भाव होने की आशंका हुई। जिसके चलते उन्होंने धोखे से अमृत को चुरा लिया और वहां से प्रस्थान कर गए।

अमृत को असुरों से पुनर्प्राप्त करने के लिए नारायण (विष्णु देव) ने मोहिनी रूप धारण किया और असुरों से अमृत प्राप्त कर लिया। उसके बाद असुरों के इस कृत्य के कारण यह निर्णय लिया गया कि देवताओं को सर्वप्रथम अमृत ग्रहण करने का अवसर मिलेगा। नारायण ने स्वयं अपने हाथों से अमृत ग्रहण करवाने का कार्य आरम्भ किया।

किन्तु कुछ असुरों को संदेह था कि अमृत उन्हें मिलेगा या नहीं। इस हेतु उन्होंने देवताओं का वेश धारण किया और अमृत ग्रहण करने का छल किया। लेकिन जैसे ही असुर स्वर्भानु की बारी आयी तब सूर्य और चंद्र देव ने स्वर्भानु को पहचान लिया और नारायण को सचेत कर दिया । किन्तु तब तक असुर स्वर्भानु अमृत ग्रहण कर चूका था।

लेकिन अमृत उसके गले से नीचे जा पाता उससे पहले,

नारायण ने अपने सुदर्शन चक्र से स्वर्भानु का शीश धड़ से अलग कर दिया। उसके बाद महादेव ने कटे हुए सिर और धड़ को नामांकित किया, जिन्हें राहु (कटा हुआ सिर) और केतु (धड़) कहा जाता हैं।

राहु की दशा क्या है?

राहु की दशा, जिस व्यक्ति की कुंडली पर पड़ जाती है उस व्यक्ति की बुद्धि भ्रष्ट होने लग जाती है। उस व्यक्ति को अपने जीवन में काफी कठिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में राहु की दशा व्यक्ति के मानसिक एकाग्रता को भांग कर देती है, जिससे वो गलत निर्णय लेता है और स्वयं को नुकसान पहुँचाने लगता है।

राहु की दशा को पहचानने के लक्षण: -

  1. मानसिक तनाव
  2. आर्थिक नुकसान
  3. शारीरिक व्याधियां
  4. गलतफहमियां
  5. चिड़चिड़ापन
  6. जल्दी से क्रोधित हो जाना
  7. कुवाक्य का प्रयोग करना
  8. नाख़ून का अपने आप टूटना
  9. नशा करना
  10. जुआ खेलना

यदि आप इन सभी लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं तो आपको राहु को प्रसन्न करना होगा, जिससे आपको राहु किसी भी प्रकार की क्षति न पहुंचा सके। राहु को खुश करने के लिए हमने कुछ अचूक उपाय साझा किये हैं जिनका अनुसरण कर आप राहु को खुश कर सकते हैं।

राहु को खुश करने के अचूक उपाय

  • राहु को खुश करने के लिए सुबह राहु मन्त्र का जाप करें।
  • उबले हुए जल का सेवन करें।
  • ताज़ा खाना खाएं।
  • रोज़ाना एक नियमित समय पर स्नान करें।
  • चन्दन का उपयोग करें, आप चाहें तो चन्दन का टीका भी लगा सकते हैं, इससे राहु खुश होते हैं।
  • ज़्यादा बड़े बाल न रखें।
  • कानों को साफ़, नाखूनों को छूटा रखें।
  • मच्छर और मक्खियों को घर में न आने दें।
  • मवेशियों और गली के कुत्तों को खाना खिलाएं।
  • लम्बी यात्रा न करें।
  • दारु, गुटखा और तम्बाकू जैसे नशीले पदार्थों का सेवन न करें। इससे राहु का प्रभाव अधिक होता है।
  • जुए और सट्टे से दूर रहें।
  • भगवान शिव और उनके गले पर विद्यमान शेषनाग (वासुकि) की आराधना करें, इससे राहु का प्रभाव काम होगा।
  • हो सके तो सुबह योग अभ्यास करें।

राहु दशा में पूछे जाने वाले सवाल - FAQ

राहु कौन है?

राहु स्वर्भानु के कटे हुए सिर का नाम है। राहु एक असुर है।

राहु की दशा की अवधि कितनी होती है?

राहु की दशा की अवधि 18 वर्ष होती है।

राहु की दशा में कौन से कारक होते हैं?

राहु की दशा में झूठ, जुआ, नशा, ईर्ष्या, लालच, आर्थिक नुकसान और संक्रमण जैसे कारक होते हैं।

क्या राहु व्यक्ति को उत्साही बनाता है?

जी हाँ, राहु की दशा में व्यक्ति कम समय में अति-उत्साही हो जाता है और इसी उत्साह के चलते वह अपना नुकसान कर बैठता है।

राहु के घर में प्रवेश करने पर क्या होता है?

राहु के घर में प्रवेश करने पर घर के सीवर लाइन में समस्या होने लगती है।

क्या राहु स्वास्थ्य के लिए अच्छा है?

जी नहीं, राहु एक विषधारी सर्प है इसलिए वह आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है। यह आपको हानि पहुंचा सकता है।

राहु की दशा में कौन से रोगों की उत्पत्ति होती है?

राहु की दशा में पेट ख़राब होना, दस्त और सिरदर्द जैसे रोगों की उत्पत्ति होती है।